झोपड़ियां और कालोनियों के पुनर्वास

शहर में श्रम उपनिवेशों की बड़ी संख्या है। उनमें से कुछ सरकारी अविकसित भूमि पर हैं और उनमें से कुछ निजी भूमि पर हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने इन सभी श्रम उपनिवेशों को पुनर्वास करने का निर्णय लिया है जो वर्ष 1996 से पहले आए थे। पंजाब विश्वविद्यालय से संबंधित भूमि पर ऐसी एक कॉलोनी को 25 में पुनर्वास किया गया है। इस कॉलोनी के विकास कार्यों की तरह सड़कों , पानी की आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम, तूफान जल निकासी व्यवस्था इत्यादि नगर निगम द्वारा लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से की गई है। जल स्टैंड पोस्ट, सुलाभ सौचालय और मोबाइल टॉयलेट वैन के रूप में सामुदायिक शौचालय भारत सरकार के बुनियादी न्यूनतम सेवा कार्यक्रम के तहत अनधिकृत कॉलोनियों में उपलब्ध कराए गए हैं।

अंतिम संशोधित तिथि : 30-10-2018
आखरी अपडेट: 03/08/2018 - 18:15
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